सर्वर ठप, साढ़े तीन लाख शिक्षक नहीं कर पाए लाॅग-आउट, तलाशते रहे नेटवर्क
शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या पहले से बनी हुई है। इसके चलते ई-अटेंडेंस की प्रक्रिया पूरी करने में अत…और पढ़ें

HighLights
- शाम चार बजे तक लाॅग-आउट करने के लिए यहां-वहां भटकते रहे शिक्षक।
- लोक शिक्षक संचालनालय ने शाम 5 बजे जारी किया आदेश, तब मिली राहत।
- शिक्षक नेटवर्क मिलने की उम्मीद में परिसर के अलग-अलग हिस्सों में घूमते रहे।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था गुरुवार को तकनीकी समस्या के कारण शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बन गई। ‘हमारे शिक्षक’ एप के जरिये सुबह 10 बजे स्कूल में लग-इन करने वाले करीब साढ़े तीन लाख शिक्षक शाम चार बजे तक लाग-आउट नहीं कर सके।
दरअसल, गुरुवार को सर्वर ठप हो गया था, जिससे शिक्षक लंबे समय तक नेटवर्क तलाशते रहे। कई स्कूलों में शिक्षक मोबाइल नेटवर्क मिलने की उम्मीद में परिसर के अलग-अलग हिस्सों में घूमते रहे।
कुछ शिक्षक स्कूल भवन की छत तो कुछ आसपास के ऊंचे स्थानों पर जाकर लाॅग-आउट करने का प्रयास करते दिखे। शाम करीब साढ़े चार बजे तक प्रयास के बावजूद कई शिक्षक लाॅग-आउट नहीं कर पाए।
बाद में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शाम पांच बजे इस संबंध में आदेश जारी किया। तब जाकर उन्हें राहत मिली।
नेटवर्क की समस्या से बढ़ रहा समय
- शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या पहले से बनी हुई है। इसके चलते ई-अटेंडेंस की प्रक्रिया पूरी करने में अतिरिक्त समय लग जाता है।
- शिक्षकों के अनुसार पारिवारिक आपात स्थिति या तबीयत खराब होने जैसी परिस्थितियों में भी छह घंटे की ई-अटेंडेंस पूरी किए बिना कार्यस्थल छोड़ना मुश्किल होता है।
- सर्वर की समस्या आने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामी के कारण लाॅग-आउट नहीं होने पर जिम्मेदारी तय करने से पहले विभाग को सर्वर और नेटवर्क व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए।
पहले सुविधाएं, फिर ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता
- शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने से पहले सरकार को शिक्षकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। इनमें आवास, सुरक्षित आवागमन और विशेष ग्रामीण भत्ता शामिल हैं।