एमपी में शादी के बाद भी लिव-इन में गए तो होगी जेल, UCC के पक्ष में 80% मुस्लिम महिलाएं और 40 प्रतिशत पुरुष
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हों या फिर अन्य वर्गों के लोग, सभी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन किया है। 80 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने समान कानून को लागू किए जाने के पक्ष में होने की बात कही। जबकि, 40 फीसद मुस्लिम पुरुषों ने भी कहा कि हमारे लिए भी यह कानून लागू हो। उनका मत है कि यदि इससे हमारी बहन-बेटियां सुरक्षित होती हैं तो फिर इसे लागू किया जाना चाहिए।
प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। इसने सभी जिलों में जन परामर्श किया, जिसमें 1,134 सुझाव मिले। 3.49 लाख एसएमएस भेजे गए। वेब पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि 93.54 प्रतिशत नागरिकों ने समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया। 92.66 फीसदी लोगों ने इस पर सहमति जताई कि सभी समुदायों में महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार मिलना चाहिए।
लिव इन रिलेशनशिप: छोड़े जाने पर गुजारा भत्ता का दावा कर सकती है महिला
यूसीसी में यह प्रविधान भी किया गया है कि लिव इन में रहने वाला यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है। बिना पंजीयन एक माह से ज्यादा साथ रहने पर तीन महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर तीन माह की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर छह माह तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।
वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो, बेटों-बेटियों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार
यूसीसी में प्रविधान किया गया है कि बच्चों की कस्टडी से जुड़े किसी भी विवाद में माता-पिता के अधिकारों के मुकाबले बच्चे का हित और सर्वांगीण विकास ही अदालत के फैसले का मुख्य और अनिवार्य आधार होगा। बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-एक का उत्तराधिकारी माना गया है और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे।
बिना वसीयत ऐसे होगा संपत्ति का बंटवारा: हत्या के दोषी विरासत से होंगे अयोग्य
बिना वसीयत के यदि किसी व्यक्ति का निधन हो जाता है तो उसकी संपत्ति को तीन वर्गों (क्लास-एक, क्लास-दो और अन्य रिश्तेदार) में क्रमिक तरीके से बांटा जाएगा। यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या या उसमें मदद का दोषी है, तो वह विरासत से हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा। यदि किसी का कोई कानूनी वारिस नहीं है, तो एस्चीट सिद्धांत के तहत संपत्ति राज्य को हस्तांतरित हो जाएगी। नई धर्मनिरपेक्ष प्रणाली के तहत अब कोई भी स्वस्थ दिमाग का वयस्क अपनी सौ फीसद संपत्ति वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है। इससे पुरानी अनिवार्य उत्तराधिकार की सीमाएं (जैसे इस्लामी कानून में एक-तिहाई की सीमा) समाप्त हो गई हैं।
कांग्रेस ने नहीं दिए सुझाव, बैठक से बनाई दूरी, अब समर्थन करे: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि आम आदमी पार्टी, सीपीआइ सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि यूसीसी को लेकर जन परामर्श में शामिल हुए लेकिन कांग्रेस ने इससे दूरी बनाकर रखी। राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं लेकिन इस मामले में सबको समर्थन करना चाहिए।
मंत्रियों के साथ कैबिनेट की बैठक के लिए ई-बस से पहुंचे मुख्यमंत्री
जगदीशपुर में कैबिनेट की बैठक के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रियों के साथ ई-बस से पहुंचे। सभी मंत्री और उनका स्टाफ सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। साढ़े 10 बजे तीन इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से बैठक स्थल के लिए रवाना हुए और लगभग 11 बजे महल पहुंचे। प्रदर्शनी का अवलोकन करके साढ़े 11 बजे कैबिनेट की बैठक के लिए तैयार किए गए डोम में पहुंचे। लगभग डेढ़ घंटे बैठक चली। मुख्यमंत्री ने जगदीशपुर में कैबिनेट की बैठक करने को लेकर कहा कि इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व है, जो गोंड राजवंश से जुड़ा है। वीरता और त्याग का संदेश यहां से निकला। भावी पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से परिचित हो, इस मकसद से यह कदम उठाया गया।
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लखन पटेल नहीं पहुंचे, कुछ वर्चुअल शामिल हुए
कैबिनेट बैठक में आनंद विभाग के मंत्री लखन पटेल शामिल नहीं हुए। कुल 18 मंत्री बैठक में पहुंचे। वहीं, उदय प्रताप सिंह, प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित कुछ मंत्री वर्चुअल शामिल हुए।