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दमोह के बाद भोपाल सहित प्रदेश भर के संजीवनी क्लीनिकों में जांच तेज, नौ फर्जी डाॅक्टर बर्खास्त


दमोह जिले में पहला मामला सामने आने के बाद विभाग ने प्रदेश भर के संजीवनी क्लीनिकों और अस्पतालों में तैनात डाॅक्टरों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी शुरू कर …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 06 Jun 2026 11:24:42 PM (IST)Updated Date: Sat, 06 Jun 2026 11:28:57 PM (IST)

दमोह के बाद भोपाल सहित प्रदेश भर के संजीवनी क्लीनिकों में जांच तेज, नौ फर्जी डाॅक्टर बर्खास्त
मध्‍य प्रदेश में फर्जी डाॅक्टर का मामला।

HighLights

  1. ऐसे दस और संदिग्‍धों पर है नज़र।
  2. संविदा डाॅक्टरों की भी जांच होगी।
  3. दस्तावेजों का भी होगा वेरिफिकेशन।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में फर्जी डिग्री के सहारे मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले कथित डाक्टरों के खिलाफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने बड़ा हंटर चलाया है। एनएचएम की शुरुआती जांच में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से नौ फर्जी डाक्टर पकड़े गए हैं।

विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन सभी फर्जी डाॅक्टरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है, साथ ही संबंधित जिलों के थानों में इनके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

दमोह जिले में पहला मामला सामने आने के बाद विभाग ने प्रदेश भर के संजीवनी क्लीनिकों और अस्पतालों में तैनात डाॅक्टरों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी शुरू कर दी है, जिससे हड़कंप मचा हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, दमोह में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अब तक 81 डॉक्टरों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा चुकी है। विभाग का यह जांच अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है।

भोपाल के संजीवनी क्लीनिकों में भी स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें ताबड़तोड़ जांच कर रही हैं। विभाग का मुख्य फोकस इस बात पर है कि किसी भी सरकारी या संविदा केंद्र पर बिना वैध डिग्री के कोई व्यक्ति प्रैक्टिस न कर पाए।

10 और फर्जी डाॅक्टर मिलने की आशंका

  • स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही फर्जी डाॅक्टरों का यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है।
  • फिलहाल 10 और संदिग्ध डाॅक्टरों की सूचियां तैयार की गई हैं, जिनकी डिग्रियां और रजिस्ट्रेशन नंबर जांच के घेरे में हैं।
  • संभावना जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में इनके फर्जीवाड़े का भी आधिकारिक खुलासा हो जाएगा।
  • मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत सभी संविदा डाॅक्टरों की भी नए सिरे से जांच करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
  • अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • यदि जांच के दौरान किसी भी डाॅक्टर के दस्तावेज फर्जी या संदिग्ध पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ न केवल बर्खास्तगी बल्कि जेल भेजने की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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