Indore

75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची एमपी सरकार, पात्रता परीक्षा को TET के बराबर मानने की रखी मांग


मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2005 से 2009 के दौरान पदस्थ हुए लगभग 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन की राह आसान करने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 11:12:22 AM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 11:12:22 AM (IST)

75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची एमपी सरकार, पात्रता परीक्षा को TET के बराबर मानने की रखी मांग
75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची एमपी सरकार

HighLights

  1. 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची मप्र सरकार
  2. सरकार ने पात्रता परीक्षा को TET के बराबर मानने की रखी मांग
  3. शिक्षक अब आपसी सहमति से बदल सकेंगे स्कूल और जिला

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2005 से 2009 के दौरान पदस्थ हुए लगभग 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन की राह आसान करने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शीर्ष अदालत में एक पूरक अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई है कि 2005 और 2008 में आयोजित संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-2 पात्रता परीक्षा को ही ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (TET) के समकक्ष मान्यता दी जाए।

विभाग का कहना है कि उस दौरान ली गई परीक्षा का प्रारूप और स्तर वर्तमान टीईटी के समान ही था, इसलिए इतने सालों से सेवा दे रहे शिक्षकों को पुन: टीईटी परीक्षा देने के लिए विवश न किया जाए। सरकार का तर्क है कि देश में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून अप्रैल 2010 में लागू हुआ था, जबकि मध्यप्रदेश में शिक्षकों के चयन हेतु पात्रता परीक्षा प्रणाली वर्ष 2005 से ही अस्तित्व में है। यदि कोर्ट से सकारात्मक राहत मिलती है, तो 2011 से पहले भर्ती हुए इन हजारों शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

टीईटी उत्तीर्ण करने पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने हालिया आदेश में स्पष्ट किया है कि अध्यापन के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने सख्त हिदायत दी है कि अगस्त 2028 तक जो शिक्षक टीईटी पास नहीं करेंगे, उन्हें सेवा से पृथक किया जा सकता है।

पूरक याचिका क्या है?

यह अदालत में पहले से लंबित किसी मामले के अंतर्गत दायर की जाने वाली एक अतिरिक्त अर्जी होती है। इसका उपयोग मुख्य केस के दौरान समय सीमा बढ़ाने, नए प्रमाण पेश करने या किसी निर्देश में आंशिक संशोधन की मांग के लिए किया जाता है। यह कोई नया मुकदमा न होकर पुराने मामले का ही एक अंग होती है।

शिक्षक अब आपसी रजामंदी से बदल सकेंगे स्कूल व जिला

चालू वर्ष में नियुक्त हुए करीब 7,500 प्राथमिक शिक्षकों को प्रदेश सरकार ने ट्रांसफर का मौका दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, शिक्षक म्यूचुअल ट्रांसफर के आधार पर अपना पदस्थापना स्थल बदल सकते हैं।

यह भी पढ़ें- एमपी में प्रमोशन में आरक्षण पर बड़ी खबर, सरकार ने नियम निरस्‍ती मामले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

मुख्य शर्तें एवं प्रक्रिया

  • यदि गांव में पदस्थ शिक्षक शहर जाना चाहता है, तो शहर के शिक्षक को उसी गांव के स्कूल में आना होगा।
  • अलग-अलग जिलों में कार्यरत दंपत्ति पद रिक्त होने की स्थिति में एक ही जिले में स्थानांतरण ले सकेंगे।
  • ट्रांसफर केवल समान वर्ग (सामान्य से सामान्य, एससी से एससी और एसटी से एसटी) के बीच ही संभव होगा।
  • जिला बदलाव के लिए पोर्टल पर 10 और 11 अगस्त को ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसमें दोनों शिक्षकों का हस्ताक्षरित सहमति-पत्र अपलोड करना अनिवार्य है।
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