मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, अगले साल फिर मिल सकता है प्रमोशन, 10 साल बाद खुला रास्ता
MP Promotion: सात जुलाई को हाई कोर्ट जबलपुर में होने वाली सुनवाई के दौरान यदि 2025 के पदोन्नति नियम पर कोई रोक नहीं लगाई गई तो दिसंबर के बाद दूसरे दौर…और पढ़ें

HighLights
- एमपी में 10 साल बाद शुरू हुआ पदोन्नति का दौर, अगले साल फिर मिलेगा मौका
- जबलपुर हाई कोर्ट की सुनवाई के बाद दिसंबर से शुरू हो सकता है दूसरा दौर
- निर्माण विभागों के इंजीनियरों के प्रमोशन पर सुप्रीम कोर्ट के कारण संशय
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में भले ही 10 वर्ष से पदोन्नतियां रुकी हुईं थीं लेकिन अब एक बार जो सिलसिला प्रारंभ हुआ है तो फिर अगले साल फिर पदोन्नति दी जा सकती हैं। सात जुलाई को हाई कोर्ट जबलपुर में होने वाली सुनवाई के दौरान यदि 2025 के पदोन्नति नियम पर कोई रोक नहीं लगाई गई तो दिसंबर के बाद दूसरे दौर की पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी।
हालांकि, निर्माण विभागों में पदोन्नति को लेकर संशय की स्थिति है क्योंकि इंजीनियरों के मामले में ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा यथास्थिति बनाकर रखने के निर्देश दिए गए थे। जब प्रदेश सरकार ने पदोन्नति नियम 2025 बनाया था, तब तैयारी थी कि एक साथ दो वर्ष की पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक करके सूचियां तैयार कर ली जाएंगी।
न्यायालय में लंबित होने से हुआ विलंब, विधिक अभिमत के बाद प्रक्रिया शुरू
जनवरी में दूसरी सूची के आदेश जारी होंगे लेकिन मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण इसमें विलंब हो गया। अब जब विधिक अभिमत के आधार पर पदोन्नतियां प्रारंभ कर दी गई हैं तो पहला चक्र इस वर्ष में पूरा करके अगले वर्ष के लिए तैयारी प्रारंभ कर दी जाएगी।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दस वर्ष से पदोन्नतियां नहीं होने के कारण जो पात्र कर्मचारी हैं, वे पहले ही उच्च पदों का वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं। उन्हें केवल पदनाम नहीं मिला था, जो अब दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अगली पदोन्नति के लिए भी पात्र हो गए हैं। यदि कोई बाधा नहीं आई तो इन्हें अगले साल पदोन्नत कर दिया जाएगा।
निर्माण विभागों में पदोन्नति पर संशय बरकरार
वहीं, निर्माण विभागों में पदोन्नति को लेकर संशय की स्थिति है। दरअसल, अधीक्षण यंत्री पद के प्रभार में जो लोग हैं, उन्हें लेकर ही मामला उठा था। इन्हें पदावनत करने के स्थान पर सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई और यथास्थिति बनाकर रखने के निर्देश मिले।
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अब सवाल यह उठ रहा है कि जब यथास्थिति बनाकर रखने के लिए कहा गया है तो फिर इन्हें पदोन्नत किस आधार पर किया जाएगा। उधर, सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न न्यायालयीन मामलों में यह स्पष्ट हो चुका है कि पदोन्नति पर कोई रोक नहीं है। विधिक अभिमत भी प्राप्त कर लिया गया है, जिसके आधार पर कार्रवाई प्रारंभ हो चुकी है।
