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भोपाल की सड़कों पर जानलेवा बने गड्ढे, पहली बारिश में खुली पोल, ट्रॉमा सेंटरों में मरीजों की संख्या में 53% का उछाल


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून की पहली बारिश ने शहर की सड़कों की पोल खोलकर रख दी है। सड़कों पर हुए बड़े-बड़े गड्ढे और बारिश के कारण फिसलन भरी …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 02:03:14 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 02:03:14 PM (IST)

भोपाल की सड़कों पर जानलेवा बने गड्ढे, पहली बारिश में खुली पोल, ट्रॉमा सेंटरों में मरीजों की संख्या में 53% का उछाल
सड़क दुर्घटना में घायल युवक को एंबुलेंस से जेपी अस्पताल लाया गया। नवदुनिया।

HighLights

  1. मानसून की पहली बारिश ने सड़कों की पोल खोलकर रख दी
  2. जेपी अस्पताल में रोज आठ-10 से बढ़कर 20-25 ट्रॉमा केस
  3. हमीदिया और एम्स भोपाल में भी इमरजेंसी पर दबाव बढ़ा

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी में मानसून की पहली बारिश ने शहर की सड़कों की पोल खोलकर रख दी है। सड़कों पर हुए बड़े-बड़े गड्ढे और बारिश के कारण फिसलन भरी स्थिति अब आम नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। सड़कों की खस्ताहाली का असर सीधा शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों के इमरजेंसी और ट्रामा सेंटरों पर पड़ रहा है, जहां घायलों की संख्या में पिछले एक सप्ताह में 53 प्रतिशत तक का भारी इजाफा दर्ज किया गया है। रोजाना अब 20 से 25 गंभीर मरीज इन अस्पतालों के ट्रामा सेंटरों में भर्ती हो रहे हैं।

आंकड़ों पर गौर करें तो एक से छह जून तक जब मौसम सामान्य था, तब इन अस्पतालों में स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन सात से 14 जून के बीच हुई वर्षा के बाद हादसों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार, जेपी अस्पताल में सामान्य दिनों में ट्रामा के 8-10 केस आते थे, जो अब बढ़कर 20-25 हो गए हैं। इसी तरह हमीदिया अस्पताल में 10-12 के मुकाबले 22-26 और एम्स भोपाल में सात-नौ के स्थान पर 18-22 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।

फिसलन और कम दृश्यता बनी काल

108 एंबुलेंस सेवा के अनुसार, पिछले सात दिनों में सड़क हादसों से जुड़ी आपातकालीन काल्स की संख्या में अचानक तेजी आई है। मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा के डेटा के अनुसार छह जून को जहां केवल तीन काल दर्ज की गई थीं, वहीं सात से 14 जून के बीच यह संख्या बढ़कर कुल 46 तक पहुंच गई है। एक दिन में औसतन सात मरीजों को सड़क दुर्घटना के बाद एंबुलेंस अस्पताल पहुंचा रही है। हादसों का सबसे बड़ा कारण सड़कों पर भरे पानी के कारण गहरे गड्ढों का न दिखना और वर्षा में सड़कों पर बनी फिसलन है। दोपहिया वाहन चालक इसका सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं। अचानक ब्रेक लगाने या गड्ढे में गाड़ी अनियंत्रित होने से लोग सीधे सड़क पर गिर रहे हैं।

मुख्य मार्गों और रिहायसी क्षेत्रों में बुरे हालत

शहर के कई मुख्य मार्गों और रिहायशी इलाकों की सड़कों की हालत बदतर है। बार-बार शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत को गंभीरता से नहीं लिया। अब नतीजा यह है कि हर दिन दर्जनों परिवार इस लापरवाही के कारण अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके ओल्ड भोपाल, रायसेन रोड पर मेट्रो के प्रोजेक्ट के चलते सड़कों पर बेतरतीब गड्ढे बनाए गए हैं। वहीं वर्षा होने के कारण ये गड्ढे ढक जाते हैं और वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते हैं। यही स्थिति अरेरा कालोनी, अयोध्या बायपास, अशोका गार्डन आदि क्षेत्रों की है।

लोगों ने बताई परेशानी

एम्स भोपाल में अपने बेटे को भर्ती करने आए आलोक शर्मा (42) ने बताया कि कटारा हिल्स पर पानी से भरे गहरे गड्ढे के कारण मेरी बाइक फिसल गई। जिससे बेटे को चोंट आई है। जेपी अस्पताल में उपचाररत सुमन अहिरवार (24) ने बताया कि हल्की सी ब्रेक मारते ही स्कूटी स्लिप हो गई और मेरी हड्डी टूट गई। हमीदिया अस्पताल में उपचार कराने आए रमेश केवट (45) ने बताया कि मैं रायसेन रोड से आनंद नगर जा रहा था, जेके रोड के पास मेरा एक्सीडेंट हो गया। मेरे साथ मेरा दोस्त भी था। वह ज्यादा गंभीर है, उसे सिर में चोट आई है और मेरे घुटने छिल गए।

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इनका कहना है

इस दिनों ट्रॉमा के केस ज्यादा आ रहे हैं। इसलिए इमरजेंसी में अतिरिक्त डाक्टरों की व्यवस्था की गई है। पर्याप्त स्टाफ भी रखा है। जिससे मरीजों को परेशानी न हो- डा. संजय जैन, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल।

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