एमपी में मूंग खरीदी पर प्रदर्शन, बैरिकेड्स तोड़कर भोपाल में दाखिल हुए दो हजार किसान, सरकार ने 8 टन कोटे का भेजा प्रस्ताव
किसान इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। वे लंबी लड़ाई की पूरी तैयारी के साथ भोपाल पहुंचे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पूरे सात दिन का राशन और पीने…और पढ़ें

HighLights
- हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए और नारे लगाते हुए किसान पैदल ही बढ़े।
- पीछे ट्रैक्टर-ट्रालियों का बड़ा काफिला भी राजधानी में दाखिल हुआ।
- किसान का एक लक्ष्य था कि मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है।
नवदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसके साथ ही खाद वितरण व्यवस्था में सुधार को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को किसानों की ‘किसान क्रांति पैदल यात्रा’ भोपाल पहुंच गई।
पुलिस की तमाम नाकाबंदी और चेतावनियों के बावजूद करीब दो हजार किसान बैरिकेडिंग तोड़ शहर में प्रवेश कर गए। दोपहर के समय किसानों ने मंडीदीप स्थित भोपाल सीमा पर कलियासोत नदी के ब्रिज के पास लगी पुलिस की भारी बैरिकेडिंग तोड़ दी। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए और ‘जय जवान-जय किसान’ के नारे लगाते हुए किसान पैदल ही शहर की ओर बढ़े।

उनके पीछे ट्रैक्टर-ट्रालियों और अन्य वाहनों का एक बहुत बड़ा काफिला भी राजधानी में दाखिल हुआ। किसान का एक लक्ष्य था कि मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है। हालांकि, पुलिस ने मशक्कत के बाद उन्हें बागसेवनिया के आरआरएल तिराहे के पास रोक लिया है। फिलहाल प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत चल रही है और चर्चा पूरी होने तक उन्हें वहीं रोका गया है।
मूंग उपार्जन का कोटा आठ लाख टन करने मप्र सरकार ने भेजा प्रस्ताव
भोपाल में डेरा डालकर बैठे हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर जिलों के किसानों की मांग को लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने किसानों संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। एक घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में मूंग के उपार्जन, खाद की वितरण व्यवस्था सहित अन्य मांगों को लेकर चर्चा हुई। इसमें सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के साथ खाद की उपलब्धता को लेकर तथ्यात्मक स्थिति से अवगत कराया गया।
उधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के साथ बैठक की और स्थिति को जाना। वहीं, मुख्यमंत्री के बाद कृषि मंत्री ने मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मूंग के उत्पादन की स्थिति को सामने रखते हुए कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसान हितैषी है और हमेशा उनके साथ खड़ी है। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को बताया गया कि प्रदेश की ओर से 14 मई और तीन जुलाई को ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन का कोटा आठ लाख छह हजार टन करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जा चुका है।
25 जुलाई को फिर पत्र भेजा गया। इसके साथ ही यह भी बताया कि ग्रीष्मकालीन मूंग का क्षेत्रफल लगभग 14.30 लाख हेक्टेयर है। उत्पादन 20.16 लाख टन संभावित है। पिछले साल 4.19 लाख टन का लक्ष्य दिया गया था, इसके विरुद्ध 7.72 लाख टन का उपार्जन किया गया। प्रदेश में इस वर्ष 3.47 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 82 हजार ने मूंग बेची है।
शांति बनाए रखने की अपील
कृषि मंत्री ने किसानों से शांति बनाए रखने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार और किसान एक-दूसरे के सहयोगी हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना तथा उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी संवाद और सकारात्मक प्रयासों से किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान होगा। प्रदेश में खरीदी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुचारु बनाया जाएगा। उधर, कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लें। पार्टी किसानों के साथ है।
किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि सरकार उनकी न्यायोचित मांगों के प्रति संवेदनशील है और सभी मुद्दों का शीघ्र एवं सकारात्मक समाधान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए तथा मूंग खरीदी सहित अन्य विषयों पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
– एदल सिंह कंषाना, कृषि मंत्री, मप्र

सात दिन का राशन लेकर आए हैं किसान
- किसान इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। वे लंबी लड़ाई की पूरी तैयारी के साथ भोपाल पहुंचे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पूरे सात दिन का राशन और पीने का पानी रखा है।
- कई किसान तो पहले से दाल-बाटी बनाकर भी साथ लाए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी सारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं लौटेंगे।
- व्यापक आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के 19 अलग-अलग किसान संगठन शामिल हैं।
- प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से नर्मदापुरम, हरदा, सिवनी और रायसेन जिले के किसान भारी संख्या में पहुंचे हैं।
- इससे पहले मंगलवार सुबह पुलिस ने किसानों को औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा के पास भी कुछ देर के लिए रोका था।
- प्रशासन ने बातचीत कर उन्हें वहीं रुकने का आग्रह किया था, लेकिन किसान नहीं माने और अपना पैदल मार्च जारी रखा।

ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई, लोग परेशान
- किसानों के इस बड़े कूच से भोपाल की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। नर्मदापुरम रोड पर भारी जाम लग गया।
- स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शुरुआत में एक तरफ का रास्ता बंद किया, लेकिन बाद में मिसरोद के पास कुछ देर के लिए दोनों तरफ के रास्ते बंद करने पड़े।
- इस जाम के कारण आसपास की लगभग 150 कालोनियों में रहने वाले हजारों लोग खासे परेशान हुए। लोगों का एमपी नगर, बावड़िया कलां, कोलार, 10 नंबर और अन्य मार्केट तक जाना मुश्किल हो गया।
- सुबह मंत्रालय और अन्य सरकारी दफ्तरों में गए कर्मचारी भी इस भारी जाम में बुरी तरह फंस गए।
- सोमवार सुबह से ही पुलिस की नाकाबंदी के बावजूद किसानों का इतनी आसानी से शहर में घुस जाना पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहा है।
- स्पष्ट रूप से पुलिस स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ पाई और इस बड़े प्रदर्शन से निपटने के लिए उनके पास कोई ठोस प्लानिंग नहीं थी।

