Indore

मेट्रोपालिटन सिटी की ओर बढ़ी राजधानी: भोपाल-विदिशा फोरलेन मार्ग को आज कैबिनेट देगी मंजूरी


राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। राजधानी भोपाल अब मेट्रोपोलिटन सिटी की ओर एक कदम बढ़ाने जा रहा है। इसी दिशा में भोपाल-विदिशा दो लेन मार्ग को चार लेन किया जाएगा। 1,757 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

इस मार्ग पर तीन बायपास भी बनाए जाएंगे, जिससे सूखी सेवनिया, बेरखेड़ी और सलामतपुर क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होगा। भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के विकास और भविष्य में यातायात बढ़ने की संभावना के दृष्टिगत सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना है। अगले पांच वर्ष यानी 2031 तक प्रदेश में 88,634 करोड़ की सड़कें बनाई जाएंगी।

29,682 किमी लंबे मार्गों का विकास और अपग्रेडेशन: सीएम डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मौजूदा और प्रस्तावित सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी की कमियों और संभावित विकास क्षेत्रों के इंटीग्रेटेड जीआईएस आधारित विश्लेषण के माध्यम से आवश्यकता के अनुसार प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। 2026-27 से 2030-31 तक के सड़क नेटवर्क मास्टर प्लान का लक्ष्य कुल 29,682 किलोमीटर लंबाई वाले 1,226 मार्गों का विकास और अपग्रेडेशन करना है। इन कामों की अनुमानित लागत 88,634 करोड़ है।

सीएम यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप मध्य प्रदेश में भविष्य की आवश्यकता के अनुसार आधुनिक, सुरक्षित और नियोजित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और अपग्रेडेशन हुआ है। 18,166 करोड़ की लागत से 444 किलोमीटर लंबी सात प्रमुख परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनेगी सड़क, तीन नए बायपास भी शामिल

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर क्रियान्वित होगी। चार लेन मार्ग में पक्के शोल्डर भी शामिल होंगे। यह मार्ग भोपाल में अयोध्या बायपास पर भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाएगा, जो सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर से होकर गुजरता है। यह भोपाल, रायसेन और विदिशा जिले को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मार्ग है।

परियोजना में सूखी सेवनिया बायपास (1.80 किलोमीटर), बेरखेड़ी बायपास (1.35 किलोमीटर) और सलामतपुर बायपास (5.10 किलोमीटर) बनाए जाएंगे। इससे इन आबादी वाले इलाकों में गाड़ियों का दबाव कम होगा, सड़क दुर्घटनाओं का खतरा घटेगा और स्थानीय निवासियों के लिए यात्रा सुरक्षित होगी। यह रूट भोपाल-कानपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए एक महत्वपूर्ण फीडर कॉरिडोर के तौर पर भी काम करेगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण रूट

भोपाल-विदिशा मार्ग केवल यातायात के लिए नहीं बल्कि धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है। आसपास के इलाके में दुनिया भर में प्रसिद्ध सांची स्तूप, संग्रहालय, अशोक स्तंभ, उदयगिरि की गुफाएं और कई दूसरी पुरातात्विक और सांस्कृतिक स्थल हैं। यह कर्क रेखा को भी पार करता है, जिससे इसे खास भौगोलिक महत्व मिलता है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) भी एक नया चार लेन राजमार्ग बना रहा है जो रायसेन, सांची और विदिशा को बायपास करते हुए निकलता है। इस परियोजना से उसके जुड़ने से भोपाल, सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना में भी कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

उज्जैन-इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में मजबूत हो रहा सड़क नेटवर्क

उधर, प्रदेश में चारों तरफ सड़क नेटवर्क को मजबूत करने का काम चल रहा है। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में इंदौर-उज्जैन छह लेन, इंदौर-उज्जैन चार लेन ग्रीनफील्ड, उज्जैन-जावरा चार लेन ग्रीनफील्ड, उज्जैन-मक्सी चार लेन का चौड़ीकरण, उज्जैन सिंहस्थ बायपास और हरिफाटक पुल का चौड़ीकरण किया जा रहा है।

इंदौर बाहरी रिंग रोड का विकास एनएचएआई कर रहा है। उज्जैन-झालावाड़ चार लेन मार्ग के लिए मंजूरी भारत सरकार के विचाराधीन है। उज्जैन-जावरा मार्ग के माध्यम से उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने का काम चल रहा है।

भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के लिए भविष्य की आवश्यकता के अनुरूप नेटवर्क

भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र को सुनियोजित ढांचा देने के लिए क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क के माध्यम से आसपास के कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों और आर्थिक गतिविधियों के केंद्रों से जोड़ा जा रहा है। इस योजना के तहत भोपाल पश्चिमी बायपास, भोपाल पूर्वी बायपास, भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और भोपाल-विदिशा चार लेन मार्ग शामिल हैं। भोपाल पश्चिमी बायपास को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि भोपाल पूर्वी बायपास के लिए प्रक्रिया चल रही है। भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से इन दो प्रमुख मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित होगी।

1,700 किलोमीटर की 41 परियोजनाओं के तैयार किए जा रहे हैं डीपीआर

प्रदेश में 1,700 किलोमीटर लंबाई की 41 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराए जा रहे हैं। पहले चरण में 38,456 करोड़ की अनुमानित लागत के 794 किलोमीटर लंबाई के सागर–सतना एक्सप्रेस-वे, भोपाल-मंदसौर एक्सप्रेस-वे और जबलपुर-आशापुर एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। इनके बनने से सागर और सतना के बीच यात्रा का समय छह-सात घंटे से घटकर लगभग तीन-साढ़े तीन घंटे रह जाएगा। इसी तरह भोपाल–मंदसौर और जबलपुर–आशापुर मार्गों पर वर्तमान में लगने वाला आठ-नौ घंटे का समय घटकर लगभग पांच-छह घंटे रह जाएगा।

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