Indore

करोड़ों की जमीन हड़पने के लिए गायब कर दिया सरकारी रिकॉर्ड, बुजुर्ग की जमीन पर काट दिए 13 प्लॉट, कोर्ट के आदेश पर FIR


भू-माफिया बलविंदर उर्फ पलविंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह व इनके साथियों ने मिलकर 1999 से 2004 के बीच का खसरा पंचशाला रिकार्ड ही गायब करा दिया।

Publish Date: Mon, 29 Jun 2026 12:12:13 PM (IST)Updated Date: Mon, 29 Jun 2026 12:23:11 PM (IST)

करोड़ों की जमीन हड़पने के लिए गायब कर दिया सरकारी रिकॉर्ड, बुजुर्ग की जमीन पर काट दिए 13 प्लॉट, कोर्ट के आदेश पर FIR
एआई से बना चित्र।

HighLights

  1. पुरानी छावनी इलाके में रहने वाले बुजुर्ग ने की शिकायत
  2. छह बीघा 16 बिस्वा जमीन का है मामला
  3. थाने में सुनवाई न होने पर कोर्ट पहुंचा पीड़ित

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर के पुरानी छावनी इलाके में रहने वाले बुजुर्ग की पैतृक जमीन भू-माफिया ने हड़प ली। राजस्व विभाग के खसरा पंचशाला रिकार्ड को साठगांठ से गायब कराया। इसके बाद जमीन अपनी बताकर 13 लोगों को प्लाट बेच रजिस्ट्री भी कर डाली। जब बुजुर्ग को पता लगा तो थाने से लेकर एसएसपी कार्यालय तक एफआईआर के लिए चक्कर काटे। जब सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट में परिवाद लगाया। कोर्ट ने एफआईआर के आदेश किए। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

1999 से 2004 के बीच का राजस्व रिकॉर्ड गायब

पुरानी छावनी स्थित गंगा-मालनपुर गांव में रहने वाले गोकुल कुमार जाटव ने बताया कि उनके पिता शंकरलाल जाटव ने चार जुलाई 1973 को छह बीघा 16 बिस्वा जमीन खरीदी थी। यह जमीन गोकुल व घर के अन्य लोगों के नाम पर राजस्व रिकार्ड में दर्ज हो गई। भू-माफिया बलविंदर उर्फ पलविंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह व इनके साथियों ने मिलकर 1999 से 2004 के बीच का खसरा पंचशाला रिकार्ड ही गायब करा दिया।

रजिस्ट्री की भनक नहीं लगी

सर्वे नंबर 495 की एक बीघा जमीन फर्जी तरीके से इंद्राज कराकर सुमेर सिंह कुशवाह के नाम रजिस्ट्री कर दी। 31 मई 2021 को रजिस्ट्री की गई, इसके बाद सुमेर सिंह ने जमीन पर प्लाटिंग की। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, दतिया और धौलपुर के 13 लोगों को जमीन बेचकर रजिस्ट्री कर दी।

इसकी भनक तक गोकुल व उनके स्वजन को नहीं लगी। जमीन पर जब यह लोग निर्माण कार्य करवाने के लिए पहुंचे तब पता लगा कि पलविंदर, सुरेंद्र व इनके साथियों ने जमीन बेची है। तब पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की तो कोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट के आदेश पर यूनिवर्सिटी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

कर्मचरियों की साठगांठ

इस मामले में 1999 से लेकर 2004 के बीच खसरा पंचशाला रिकार्ड गायब हुआ। यह बगैर राजस्व विभाग के कर्मचारियों की साठगांठ के संभव नहीं है। इस मामले में कर्मचारी भी आरोपी बनेंगे।

जमीन की कीमत छह करोड़ से ज्यादा

जिस जमीन पर यह फर्जीवाड़ा किया है। उसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति बीघा से अधिक चल रही है। छह बीघा छह बिस्वा जमीन छह करोड़ रुपये की है।

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