SDRF-NDRF की तरह काम करेगी डॉक्टरों की विशेष टीम, भोपाल से पूरे MP की स्वास्थ्य सेवाओं पर रखी जाएगी नजर
नईदुनिया, प्रतिनिधि, भोपाल । मध्य प्रदेश में बाढ़, भूकंप, महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अब आपदा मोचन बल के साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह समेकित (एकीकृत) होंगी।
इसके लिए केंद्र के प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत भोपाल में प्रदेश का अपनी तरह का पहला हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेटिंग सेंटर यानी एचईओसी बनाया जा रहा है।
आपातकाल में मदद पहुंचाएगी टीम
दरअसल, बाढ़ और कोई बीमारी आने पर सबसे बड़ी परेशानी होती है मरीजों तक समय पर इलाज न पहुंचना और बीमारी का फैलना। इसको रोकने के लिए ये कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। इस सेंटर में स्वास्थ्य विशेषज्ञ तैनात होंगे।
इनमें वरिष्ठ जन स्वास्थ्य परामर्शदाता बाढ़ वाले जिलों से हर घंटे की रिपोर्ट लेंगे। कहां दवा कम है, कहां डॉक्टर और एंबुलेंस चाहिए, इसकी पूरी कार्ययोजना बनाएंगे।
बाढ़ के बाद गंदे पानी से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए मैदानी टीमों को निर्देश देंगे। ये टीमें बीमारी कहां कितनी फैली, कहां रिस्क ज्यादा है, इसका मैप बनाकर बनाएंगी ताकि मदद सही जगह पहुंचे। इसके लिए उपकरण भी खरीदे जा रहे हैं और आईटी विभाग को एक्टिव किया गया है।
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ऑनलाइन होगी मॉनीटरिंग
अब इंजीनियर और आइटी टीम मिलकर पूरे प्रदेश के जिला अस्पतालों और कंट्रोल रूम को ऑनलाइन जोड़ेंगे। बाढ़ में भी नेटवर्क और सर्वर बंद न हो, ये देखेंगे। टेलीमेडिसिन और हेल्पलाइन से दूर गांव में बैठे मरीज को भी डॉक्टर की सलाह मिल सकेगी।
स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डॉ. अश्विन भगत ने बताया कि यह केंद्र कोविड के बाद मिली सीख के आधार पर बनाया गया है। अब असम जैसी बाढ़, भूकंप और उसके बाद आने वाली बीमारियों से निपटने के लिए हमारी टीम तैयार है। नई-नई बीमारियां और इबोला जैसी महामारी आने पर भी ये टीम तुरंत रिस्पान्स करेगी।
केंद्र सरकार दे रही प्रशिक्षण
इस केंद्र को चलाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को केंद्र सरकार प्रशिक्षित कर रही है। पिछले दिनों ऐसा ही एक प्रशिक्षण सत्र भोपाल में हुआ। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से आए विशेषज्ञों ने टीम को प्रशिक्षण दिया।
एचईओसी का मकसद हेल्थ रिस्पान्स को तेज करना है। रिसोर्स मैपिंग के हिसाब से काम होगा, ताकि आपदा के समय संसाधन सही जगह, सही समय पर पहुंचें और लोगों की जान बचाई जा सके। ये सेंटर राज्य स्तर पर भोपाल में रहेगा और 24 घंटे सातों दिन काम करेगा। – दिशा प्रणय नागवंशी, अपर मिशन संचालक, एनएचएम, भोपाल