Indore

MP News: जाति प्रमाण पत्र मामले में मंत्री प्रतिमा बागरी की सुनवाई पूरी, दोनों पक्षों ने पेश किए दस्तावेज; अब छानबीन समिति करेगी फैसला


सोमवार को नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र के मामले में छानबीन समिति के सामने सुनवाई पूरी हुई। शिकायतकर्ता प्रदीप अ…और पढ़ें

Publish Date: Mon, 06 Jul 2026 03:04:42 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 03:04:42 PM (IST)

MP News: जाति प्रमाण पत्र मामले में मंत्री प्रतिमा बागरी की सुनवाई पूरी, दोनों पक्षों ने पेश किए दस्तावेज; अब छानबीन समिति करेगी फैसला
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी। फोटो, एआई से तैयार की गई है।

HighLights

  1. समिति के सामने शिकायतकर्ता और मंत्री, दोनों ने रखा पक्ष
  2. अहिरवार ने 1950 और 1977 के गजट का हवाला देते हुए दस्तावेज सौंपे
  3. प्रतिमा बागरी ने आरोपों को राजनीतिक बताते हुए दावों का खंडन किया

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में सोमवार को एससी मामलों की छानबीन समिति के समक्ष सुनवाई हुई। लगभग एक घंटे तक शिकायतकर्ता और कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार का पक्ष सुना गया।इसके बाद मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने समर्थन में समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए। उनके समर्थन में सतना और पन्ना जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग भोपाल पहुंचे।

अहिरवार का पक्ष:

अहिरवार ने समिति के समक्ष कहा कि भारत सरकार के वर्ष 1950 के गजट में बागरी समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं था। उनके अनुसार वर्ष 1977 में मध्य प्रदेश का गजट जारी होने के बाद बागरी समुदाय की कुछ उपजातियां राजपूत वर्ग में और कुछ अनुसूचित जाति में शामिल हुईं।

उनका आरोप है कि प्रतिमा बागरी का परिवार मूल रूप से राजपूत वर्ग में था, लेकिन 1977 की अधिसूचना के बाद वर्ष 1981 की जनगणना में स्वयं को अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज कराया गया।

यह भी पढ़ें- MP में बड़ा फर्जीवाड़ा! मंत्री प्रतिमा बागरी ही नहीं, 500 से ज्यादा बड़े अफसर भी जाति प्रमाण पत्र के विवाद में घिरे; 7000 केस पेंडिंग

मंत्री का पक्ष:

वहीं, मंत्री प्रतिमा बागरी ने शिकायतों को राजनीतिक बताते हुए कहा कि कांग्रेस अनुसूचित जाति वर्ग की एक महिला के मंत्री बनने को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1950 में मध्य प्रदेश राज्य का गठन ही नहीं हुआ था, इसलिए उस समय की अधिसूचना के आधार पर सवाल उठाने का कोई औचित्य नहीं है।

अब समिति दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तर्कों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी।

Please follow and like us:
error20
fb-share-icon584226
Tweet 20
fb-share-icon20

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)