MP में ठगी गई राशि 77 लेयर के खातों तक ले जा चुके हैं साइबर ठग, अभी तक 3.3 लाख म्यूल खाते मिले
अधिकारियों ने इस संबंध में बताया कि प्रदेश में ठगी की राशि किसी एक केस में अधिकतम 77 लेयर तक के खातों में भेजी गई है। इससे साफ है कि ठगों के पास म्यूल…और पढ़ें

HighLights
- साइबर मुख्यालय इनके विरुद्ध शुरू करेगा ‘आपरेशन मैट्रिक्स 2.0’
- इन साइबर ठगों के पास म्यूल (किराये के) खातों का बड़ा नेटवर्क है।
- प्रदेश में अभी तक 3.3 लाख म्यूल खातों की पहचान की जा चुकी है।
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया.भोपाल। साइबर ठगी की राशि होल्ड कराने में बैंकों के सामने बड़ी चुनौती ठगों द्वारा रुपये एक के बाद एक कई लेयर (स्तर) के खातों में भेजना है। ग्वालियर में बीते दिनों चार्टर्ड अकाउंटेंट से ठगे गए 21 करोड़ रुपये 12 लेयर में हजारों खातों में भेजे गए, इस कारण अभी तक 2.05 करोड़ रुपये यानी करीब 10 प्रतिशत राशि ही होल्ड कराई जा सकी है।
अधिकारियों ने इस संबंध में बताया कि प्रदेश में ठगी की राशि किसी एक केस में अधिकतम 77 लेयर तक के खातों में भेजी गई है। इससे साफ है कि ठगों के पास म्यूल (किराये के) खातों का बड़ा नेटवर्क है। बता दें, प्रदेश में अभी तक 3.3 लाख म्यूल खातों की पहचान की जा चुकी है।
2.83 लाख साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों की जांच पर इन खातों को चिह्नित किया गया था। म्यूल खातों के विरुद्ध साइबर पुलिस मुख्यालय ने ‘आपरेशन मैट्रिक्स’ शुरू किया था, जिसमें 12 जिलों में 26 एफआईआर दर्ज कर 46 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। अब ‘आपरेशन मैट्रिक्स 2.0’ शुरू किया जाएगा।
इसमें और गहराई से जांच की जाएगी। अभी तक पहली लेयर के तीन हजार खातों की जांच की गई थी। अब दूसरे लेयर के खातों की जांच की जाएगी। खाते किनके नाम पर हैं, कितनी राशि आई, कहां गई, इस आधार पर खाताधारकों से पूछताछ की जाएगी।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी ज्यादा राशि होती है उसी हिसाब से ठग कई लेयर के खातों में उन्हें भेजते हैं। छोटी-छोटी राशि कई खातों में डाले जाने से बैंक ऐसे खातों की पहचान आसानी से नहीं कर पाते। एक खाते से राशि निकालकर दूसरे में डालना एक लेयर माना जाता है।
ठगी की राशि सबसे पहले जिस खाते में भेजी जाती है उसे पहली लेयर का खाता माना जाता है। पहली लेयर के खातों से आगे राशि जिन खातों में जाती है वे द्वितीय लेयर के होते हैं। इसी तरह लेयर बढ़ती जाती है। हर अगली लेयर में खातों की संख्या भी बढ़ती है।
प्रदेश में प्रथम लेयर के 30 हजार से अधिक खाते मिले आपरेशन मैट्रिक्स के दौरान सामने आया था कि साइबर ठग कम पढ़े-लिखे लोगों को लोन या लाटरी का लालच देकर उनके खाते का उपयोग ठगी की राशि रखने के लिए कर रहे हैं। म्यूल खाते खुलवाने और उनकी खरीद-फरोख्त में तीन अंतरराज्यीय और एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भी मिला था।
देवास सहित विभिन्न जिलों में पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि ठगों को म्यूल खाते बेचने के लिए अलग गिरोह काम करता है। देवास में ऐसे खाताधारक भी मिले थे जो खुद ठगों से मिले हुए थे। जितनी राशि खाते में आती थी उसी के अनुसार उन्हें कमीशन दिया जाता था। रीवा, सतना, पन्ना में म्यूल खाते अधिक मिले हैं।
