तिघरा का जलस्तर घटा… ककैटो-अपर ककैटो भी खाली, ग्वालियर में गहरा सकता है जल संकट; दो दिन छोड़कर पानी देने पर विचार
ऐसे में आकस्मिक परिस्थिति में वहां से पानी लिफ्ट करने का विकल्प भी फिलहाल समाप्त हो गया है। अफसरों के अनुसार वर्तमान जलस्तर से करीब चार माह तक शहर की …और पढ़ें

HighLights
- 37 फीसदी पर सिमटा तिघरा
- वैकल्पिक बांध भी पड़े रीते
- मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मानसून में ब्रेक के बीच तिघरा बांध का जलस्तर फिर घटने लगा है। वर्तमान में बांध का जलस्तर करीब 726 फीट है। इसके चलते शहर में एक अगस्त से लागू एक दिन छोड़कर जलप्रदाय व्यवस्था आगे भी जारी रहने की संभावना है। जलस्तर में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई तो आने वाले समय में दो दिन के अंतराल से पानी देने की स्थिति भी बन सकती है।
कोई वैकल्पिक स्रोत भी नहीं उपलब्ध
इस बार तिघरा के अलावा जलापूर्ति के लिए कोई वैकल्पिक स्रोत भी उपलब्ध नहीं है। दो साल पहले अल्पवर्षा के दौरान तिघरा का जलस्तर कम होने पर ककैटो और अपर ककैटो बांध से पानी लिफ्ट कर तिघरा में लाने की तैयारी की गई थी। इस बार इन दोनों बांधों में भी पर्याप्त पानी नहीं है।
आगे की स्थिति सिर्फ मानसून पर निर्भर
ऐसे में आकस्मिक परिस्थिति में वहां से पानी लिफ्ट करने का विकल्प भी फिलहाल समाप्त हो गया है। अफसरों के अनुसार वर्तमान जलस्तर से करीब चार माह तक शहर की जरूरत पूरी की जा सकती है। हालांकि आगे की स्थिति पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। यदि वर्षा होती है और तिघरा का जलस्तर 730 फीट से ऊपर पहुंचता है तो एक दिन छोड़कर जलप्रदाय की व्यवस्था सालभर तक जारी रखी जा सकती है। इसके विपरीत यदि बांध में पानी की आवक नहीं बढ़ी तो जल संकट से निपटने के लिए दो दिन के अंतराल से जलप्रदाय का विकल्प अपनाना पड़ सकता है।
बता दें कि शहर की जलापूर्ति का मुख्य आधार तिघरा है। तिघरा के अपस्ट्रीम में ककैटो और अपर ककैटो बांध होने के बावजूद इस बार वहां से मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। दोनों जलाशयों में भी पानी की कमी के कारण उन्हें वैकल्पिक स्रोत के रूप में इस्तेमाल करना संभव नहीं है। ऐसे में इस बार शहर की जलापूर्ति पूरी तरह तिघरा के पानी की आवक पर निर्भर हो गई है।
तिघरा सिर्फ 37 प्रतिशत भरा, बाकी बांध भी रीत रहे
- तिघरा बांध: तिघरा बांध का वर्तमान जल स्तर 726.30 फीट है। बांध में 1654.74 एमसीएफटी पानी शेष है। वर्तमान में नगर निगम द्वारा इस बांध से 8.72 एमसीएफटी पानी प्रतिदिन लिया जा रहा है, जिसे विधानसभा क्षेत्रवार एक दिन छोड़कर वितरित किया जा रहा है। बांध अपनी कुल जल संग्रहण क्षमता का सिर्फ 37.71 प्रतिशत भरा हुआ है।
- पेहसारी बांध: तिघरा की अप स्ट्रीम पर बना हुआ ये बांध भी अभी रीत रहा है। कुछ दिनों पहले बांध में पानी आने पर यहां से तिघरा के लिए नहर खोली गई थी। बांध की कुल जल संग्रहण क्षमता 1743 एमसीएफटी पानी की है। वर्तमान में बांध में कुल जल 444.97 एमसीएफटी जीवित जल है, जिसका उपयोग किया जा सकता है। बांध की स्थिति डेंजर लेवल में मानी जा रही है।
- ककैटो बांध: इस बांध की कुल जल संग्रहण क्षमता 2844 एमसीएफटी पानी की है, लेकिन इसमें डेड स्टोरेज को हटा दिया जाए तो जीवित जल के रूप में सिर्फ 1455 एमसीएफटी पानी आता है। वर्तमान में बांध में सिर्फ 477.37 एमसीएफटी जीवित जल मौजूद है। बांध अपनी कुल क्षमता का सिर्फ 32.80 प्रतिशत भरा हुआ है। वर्षा न होने की स्थिति में इस बांध से भी सिर्फ सीमित सहायता ही मिल सकेगी।
- अपर ककैटो बांध: इस बांध की कुल जीवित संग्रहण क्षमता 1845.24 एमसीएफटी है, लेकिन वर्तमान में बांध में सिर्फ 350.32 एमसीएफटी पानी मौजूद है। ये सिर्फ 18.99 प्रतिशत भरा हुआ है। इसमें कुल मिलाकर 1500 एमसीएफटी पानी अभी और आ सकता है। वर्षा नहीं होने के कारण इस बांध की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जबकि ये इस स्ट्रीम में सबसे ऊपर बना हुआ है।
तिघरा बांध अभी काफी खाली है। इसकी अप स्ट्रीम में बने बांधों की स्थिति भी ठीक नहीं है। हालांकि अभी मानसून का सीजन शेष है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि वर्षा होने की स्थिति में यदि बांध 730 फीट तक भर जाता है, तो कुछ संतोषजनक स्थिति बन सकती है। -शिशिर श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री पीएचई नगर निगम।