मध्य प्रदेश में कम बारिश का असर, 30% बढ़ी बिजली की मांग, हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन गिरकर एक-चौथाई हुआ
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 03:58:57 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 03:58:57 PM (IST)
MP डेस्क, जबलपुर. मध्य प्रदेश में इस साल कम बारिश (अल्प वर्षा) का सीधा असर प्रदेश के पावर सेक्टर पर पड़ा है। बारिश कम होने से जहां एक तरफ बिजली की मांग में करीब 30% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ हाइडल पावर (Hydel Power) का जनरेशन घटकर लगभग एक-चौथाई रह गया है।
वेस्टर्न रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर(WRLDC, मुंबई) की रिपोर्ट के आधार पर यह आंकड़े रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर और एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने जारी किए हैं।
एक साल में 3,000 मेगावॉट से ज्यादा बढ़ी मांग
जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में बिजली की ज्यादा से ज्यादा मांग और कुल खपत में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है। 28 जुलाई 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 10,395 मेगावॉट थी, जो 28 जुलाई 2026 को बढ़कर 13,471 मेगावॉट पर पहुंच गई। यानी महज एक साल में मांग में 3,076 मेगावॉट की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, पिछले साल 28 जुलाई को 22 करोड़ 32 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हुई थी। जो इस साल बढ़कर 28 करोड़ 74 लाख यूनिट हो गई। इसमें करीब 30% का उछाल दर्ज किया गया है।
हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन में भारी गिरावट
कम बारिश के कारण बांधों और जलाशयों में पानी कम होने से हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन को बड़ा झटका लगा है। पिछले साल 28 जुलाई को जल विद्युत परियोजनाओं से 4 करोड़ 93 लाख यूनिट बिजली बनी थी। इस साल 28 जुलाई को यह उत्पादन गिरकर महज 1 करोड़ 17 लाख यूनिट रह गया, जो कि पिछले साल की तुलना में लगभग एक-चौथाई (25%) ही है।
महंगी बिजली खरीदने को मजबूर, जनता पर पड़ेगा बोझ
हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन में आई इस भारी कमी की भरपाई करने के लिए मध्य प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र की कंपनी NTPC से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है। पिछले साल NTPC से 77 करोड़ यूनिट बिजली खरीदी गई थी। इस साल यह खरीद दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 180 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह महंगी दर पर अतिरिक्त बिजली खरीदने का सीधा आर्थिक बोझ MP की आम जनता पर ही पड़ेगा।