MP में 2400 बसों की बॉडी की जांच: केंद्रीय पोर्टल पर सेफ्टी सर्टिफिकेट अपलोड न करने पर बस मालिकों को नोटिस; RTO पर भी लटकी तलवार
बस बॉडी निर्माताओं को अब सड़क परिवहन मंत्रालय के पोर्टल पर स्वयं फार्म 22A-2 अपलोड करना होगा, अन्यथा संबंधित बसों का पंजीयन निरस्त किया जा सकता है।

HighLights
- बिना अनिवार्य प्रमाण पत्र के पंजीयन करने वाले संबंधित आरटीओ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी
- बस बॉडी निर्माताओं को अब सड़क परिवहन मंत्रालय के पोर्टल पर स्वयं फार्म 22A-2 अपलोड करना होगा
- मध्य प्रदेश में 2400 बसों की जांच की जा रही है, बस संचालकों ने नोटिस का जताया विरोध
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बसों की बॉडी बनाने वालों के लिए फार्म 22 ए-2 को अनिवार्य कर दिया है। इसके बावजूद, एक माह बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मंत्रालय ने मध्य प्रदेश परिवहन विभाग को 2400 बसों की सूची सौंपी है।
इस पर मध्य प्रदेश के अधिकारियों का कहना है कि बसों की संख्या इतनी नहीं हो सकती, क्योंकि 1600 बसें तो कंपनी से बनकर आई हैं, जिनके पास प्रमाण पत्र होता है। अन्य बॉडी मेकर डीलरों को मंत्रालय द्वारा अधिकृत की गईं कंपनियों से प्रमाण पत्र लेना होता है।
मंत्रालय के पोर्टल पर खुद 22 ए-2 अपलोड करें
प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करता है कि बसों की बॉडी में उपयोग की गई सामग्री, फायर सेफ्टी मापदंड और प्रदूषण निवारण अधिनियम के अनुरूप है। हाल के समय में बसों में आगजनी की घटनाओं और दुर्घटनाओं में वृद्धि के कारण इसे अनिवार्य किया गया है। पहले बॉडी बनाने वालों को फार्म 22-बी के अंतर्गत घोषणा पत्र देना होता था। अब मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने निर्देशित किया है कि वह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पोर्टल पर खुद 22 ए-2 अपलोड करें।
प्रमाण पत्र अपलोड करने वाले बॉडी मेकर्स द्वारा बनाई गई बसों का पंजीयन ही वैध माना जाएगा। जो बॉडी मेकर प्रमाण पत्र नहीं दे पाएंगे, उनके द्वारा बनाई गई बसों का पंजीयन निरस्त हो सकता है। इसके अलावा, बिना प्रमाण पत्र के पंजीयन करने वाले आरटीओ भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
यह भी पढ़ें- भोपाल वासियों को बड़ी सौगात… कोच फैक्ट्री से औबेदुल्लागंज रूट पर दौड़ेंगी 10 ई-बसें, 5 दिन तक चलेगा परीक्षण
बस मालिकों ने जताया विरोध
बस मालिकों ने केंद्र को लिखा पत्र, कहा-नियम आने के पहले ही शुरू हो गया था काम परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने पिछले माह ऐसी बसों के पंजीयन निरस्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद विभाग ने बस मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। बस मालिकों ने केंद्र को पत्र भेजकर नोटिस पर विरोध जताया है, उनका कहना है कि यदि प्रमाण पत्र नहीं था तो आरटीओ ने पंजीयन क्यों किया?
उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर 2025 के बाद जब इसे अनिवार्य किया गया, तब तक कई बसों की बॉडी बनाने का काम शुरू हो चुका था। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र ने सभी राज्यों के लिए प्रमाण पत्र अनिवार्य किया था, लेकिन जिन बसों की बॉडी बनाने का काम प्रारंभ हो चुका था, उन्हें छूट मिल सकती है। मध्य प्रदेश के बस मालिकों को भी छूट मिलने की संभावना है।