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भोपाल में ₹99 लाख का स्कॉलरशिप घोटाला, 118 छात्रों के नाम पर खुले फर्जी बैंक खाते, आरोपियों से पूछताछ करेगी CBI


भोपाल में निजी कऑलेज द्वारा 118 एमबीए विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर छात्रवृत्ति के 99 लाख रुपये निकालने के मामले में CBI द्वारा आरोपितों को…और पढ़ें

Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 10:45:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 10:45:17 PM (IST)

भोपाल में ₹99 लाख का स्कॉलरशिप घोटाला, 118 छात्रों के नाम पर खुले फर्जी बैंक खाते, आरोपियों से पूछताछ करेगी CBI
कॉलेज अधिकारियों और बैंक मैनेजर की मिलीभगत से गबन।

HighLights

  1. कॉलेज अधिकारियों और बैंक मैनेजर की मिलीभगत से गबन
  2. बैंक खातों में खुद के मोबाइल नंबर लिंक कर हड़पे ₹99 लाख
  3. सीबीआई की एफआईआर में प्रेमा वर्मा समेत कई नाम शामिल

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। भोपाल में निजी कालेज द्वारा 118 एमबीए विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर छात्रवृत्ति के 99 लाख रुपये निकालने के मामले में पिछले माह एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआइ भोपाल ने जांच प्रारंभ कर दी है। जांच एजेंसी द्वारा आरोपितों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

बैंक और कॉलेज के जिम्मेदार बनाए गए आरोपित

इसमें यूको बैंक हबीबगंज शाखा की तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक प्रेमा वर्मा और कालेज के अधिकारी-कर्मचारियों को आरोपित बनाया गया है। यूको बैंक भोपाल के डीजीएम/जोनल हेड लोकेश कुमार द्वारा मार्च में की गई शिकायत की जांच के बाद सीबीआइ ने प्रकरण कायम किया है।

छात्रों की सहमति के बिना खोले गए 118 खाते

जांच में पता चला कि एक जनवरी 2020 से 31 अक्टूबर 2021 के दौरान, यूको बैंक की हबीबगंज शाखा में एकेडमी आफ मैनेजमेंट, भोपाल के एमबीए छात्रों की जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर 118 बचत खाते खोले गए। इसके बाद, सरकार से मिली स्कालरशिप की राशि इन खातों में जमा कराई गई, जिसे आरोपितों ने हड़प लिया।

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फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षर का खेल

जांच में कालेज से जुड़े विनय मल्होत्रा, आदित्य मल्होत्रा, मनोज जैन, राम सिंह वर्मा व विनेश मेश्राम की शुरुआती भूमिका सामने आई है। सीबीआइ ने प्रेमा वर्मा के साथ इन सभी को आरोपित बनाया है।

इन्होंने खाते खुलवाने और उनमें अपने मोबाइल लिंक कराने, एटीएम कार्ड लेने और धोखाधड़ी से राशि निकालने का काम किया। खाता खुलवाने में फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षरों का उपयोग किया था। बैंक ने अनिवार्य केवायसी सत्यापन नहीं कराया।

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