भोपाल डबल मर्डर : पुलिस की ‘एआई चाल’ में फंसे कातिल; गलत स्केच देख रहे बेफिक्र, फोन से पकड़े गए
डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में हुए शकुंतला और हेमंत फ़िलेमोन के चर्चित डबल मर्डर की गुत्थी को पुलिस ने पारंपरिक जांच के साथ-साथ हाईटेक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए सुलझा लिया है।
इस मामले में पुलिस ने बेहद रणनीतिक कदम उठाते हुए शुरुआती जांच के दौरान एआई से ऐसे स्केच और तस्वीरें जारी कीं, जो असल में आरोपियों की थी ही नहीं। पुलिस की यह ‘माइंड गेम’ चाल कामयाब रही और असली कातिल यह सोचकर बेफिक्र रहे कि पुलिस गलत दिशा में भटक रही है। वे शहर छोड़कर भागने के बजाय यहीं सामान्य गतिविधियां करते रहे और अंततः पुलिस के जाल में फंस गए।
24 जांच बिंदुओं ने जोड़ी कड़ियां, ऐसे हुआ पर्दाफाश
मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने पूरी साजिश को बेनकाब करने के लिए समानांतर तौर पर 24 अलग-अलग बिंदुओं पर गहन पड़ताल की। इसमें प्रॉपर्टी विवाद, कथित गिफ्ट डीड, बैंक खाते, मोबाइल सीडीआर, लोकेशन, डिजिटल ट्रांजेक्शन, सोशल मीडिया, सीसीटीवी फुटेज और हत्या में इस्तेमाल हथियार शामिल थे।
एसीपी उमेश तिवारी के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एआई तकनीक से संदिग्धों के स्केच तैयार कराए गए थे, लेकिन पुलिस ने जानबूझकर उनमें चेहरे की कुछ विशेषताएं बदल दीं ताकि मुख्य आरोपी धोखे में रहें। पुलिस की यह रणनीति सफल रही। मुख्य आरोपी श्रीकांत शहर में ही डटा रहा और पुलिस उसकी हर गतिविधि पर नजर रखती रही।
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सीडीआर और मॉर्च्युरी में सक्रियता ने खोला राज
हत्याकांड के बाद मुख्य आरोपी श्रीकांत बेहद शातिराना तरीके से सबसे पहले मॉर्च्युरी (शवगृह) पहुंचा और अंतिम संस्कार तक लगातार सक्रिय बना रहा ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, तकनीकी साक्ष्यों ने उसकी पोल खोल दी।
– नीली कार: घटनास्थल के पास सीसीटीवी में दिखी नीली कार श्रीकांत की ही निकली।
– सीडीआर का सुराग: मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि शिवानी को 300 से अधिक कॉल किए गए थे, जबकि शकुंतला को एक भी कॉल नहीं मिला, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।
– हथियार बरामद: गोताखोरों की मदद से भोपाल के बड़े तालाब से हत्या में इस्तेमाल दोनों पिस्तौल बरामद कर ली गईं, जिन्हें बैलिस्टिक जांच के लिए सागर एफएसएल भेजा गया है।
कथित गिफ्ट डीड बनी हत्या का मुख्य कारण
पुलिस के अनुसार, इस दोहरे हत्याकांड की मुख्य वजह संपत्ति का लालच था। आरोपी श्रीकांत ने एक कथित फर्जी गिफ्ट डीड के जरिए मकान अपने नाम करा लिया था। जब पुलिस ने करीब छह घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद उसके सामने सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य रखे, तो वह टूट गया।
उसने 24 जून को अपने भाई शशिकांत के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से मोबाइल भी बरामद कर लिए हैं।