गोंदिया: मौत का ‘बिना मुंडेर’ वाला कुआं, शिकार के चक्कर में अपनी जान गंवा बैठा जंगल का राजा

गोंदिया : जिले के जंगलों से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। तिरोड़ा वनपरिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम माल्ही में एक वयस्क बाघ की कुएं में गिरने से मौत हो गई। 5 साल के जंगल के इस बेताज बादशाह की जिंदगी का अंत किसी मुठभेड में नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही के कारण बने एक ‘मौत के जाल’ (बिना मुंडेर वाले कुएं) में गिरने से हुआ।
कैसे हुई यह अनहोनी?
घटना माल्ही (बिट कोडेलोहारा) के गट क्रमांक 264 की है। जानकारी के अनुसार, किसान रुपचंद इसन कावड़े के खेत में एक गहरा कुआं है, जिस पर सुरक्षा के लिए कोई दीवार (मुंडेर) नहीं बनी थी। प्राथमिक अनुमान है कि लगभग 5 साल की उम्र का यह शक्तिशाली बाघ रात के अंधेरे में किसी शिकार का पीछा कर रहा था तेज रफ्तार और शिकार के जुनून में बाघ इस खुले कुएं को देख नहीं पाया और सीधे गहरे पानी में जा गिरा। तैरने में माहिर होने के बावजूद, कुएं की बनावट और अचानक गिरने के सदमे के कारण वह बाहर नहीं निकल सका और जल-समाधि ले ली।
मौके पर पहुंचे जिलाधीश और आला वन अधिकारी
हादसे की खबर फैलते ही वन विभाग और प्रशासन में खलबली मच गई। नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व की RRT (Rapid Rescue Team) और तिरोड़ा वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। उच्च स्तरीय निरीक्षण हेतु गोंदिया के जिलाधिकारी डॉ. मंगेश गोंदवले ने स्वयं घटनास्थल का मुआयना किया। उनके साथ उपसंचालक प्रितमसिंग कोडापे, सहायक वनसंरक्षक विजय धांडे और मनीषा चव्हाण समेत भारी अमला मौजूद रहा।

जांच और प्रोटोकॉल: NTCA की निगरानी में पोस्टमार्टम*
बाघ की मौत एक राष्ट्रीय क्षति है, इसलिए इसकी जांच NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के कड़े नियमों के तहत की जा रही है। शव परीक्षण के दौरान NTCA प्रतिनिधि रुपेश निंबार्ते, मानद वन्यजीव रक्षक सावन बहेकार और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघराज तुलावी व डॉ. प्रवीण सोनवाने उपस्थित रहे। बहरहाल वनसंरक्षक श्री जी. गुरुप्रसाद और उपवनसंरक्षक पवनकुमार जॉग के मार्गदर्शन में सहायक वनसंरक्षक विजय धांडे और वनपरिक्षेत्र अधिकारी रविकमल भगत की टीम मामले की बारीकी से जांच कर रही है।
कब तक ‘बिना मुंडेर’ के कुएं निगलते रहेंगे जान ?
यह कोई पहली घटना नहीं है जब वन्यजीवों की मौत खुले कुओं के कारण हुई हो। वन्यजीव प्रेमियों ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए मांग की है कि जंगल से सटे खेतों में कुओं पर मुंडेर बनाना अनिवार्य किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और ‘रॉयल’ जान का ऐसा दर्दनाक अंत न हो।
रवि आर्य
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