क्या आपके बच्चे सुरक्षित पहुंचते हैं स्कूल? MP में 30 जुलाई से चलेगा परिवहन विभाग का चेकिंग अभियान
स्कूली बसों में विशेषकर VLTD, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, खिड़कियों में ग्रिल, बसों पर स्कूल बस का विवरण, फिटनेस, चालक का लाइसेंस, बैठने …और पढ़ें

HighLights
- प्रदेश भर की स्कूली बसों में 30 जुलाई से परिवहन विभाग का चेकिंग अभियान
- वीएलटीडी, जीपीएस, कैमरे और स्पीड गवर्नर जैसे 7 मानकों की होगी जांच
- हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद इंदौर, भोपाल, ग्वालियर व जबलपुर में अलर्ट
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश भर में परिवहन विभाग 30 जुलाई से चेकिंग अभियान शुरू करेगा। उपायुक्त किरण शर्मा ने बताया कि इस अभियान में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत स्कूली बसों में विशेषकर व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी), प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, खिड़कियों में ग्रिल, बसों पर स्कूल बस का विवरण, फिटनेस, चालक का लाइसेंस, बैठने की क्षमता के मानक, कैमरे से लेकर सभी बिंदुओं पर जांच की जाएगी।
सभी महानगरों व जिलों में इसको लेकर प्रभावी कार्रवाई का दावा किया गया है, जिसमें बड़े महानगर इंदौर, ग्वालियर, भोपाल व जबलपुर में पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
हाई कोर्ट ने दिए अवमानना के नोटिस, मांगा पुराना विवरण
हाल ही में हाई कोर्ट की ग्वालियर पीठ ने स्कूली वाहनों को लेकर प्रमुख बिंदुओं के पालन न होने पर याचिका की सुनवाई में परिवहन आयुक्त, ग्वालियर कलेक्टर, एसपी व आरटीओ को अवमानना के नोटिस जारी किए हैं। याचिका में बताया गया कि 2012 में कोर्ट ने स्कूली वाहनों में बच्चों के सुरक्षित सफर को लेकर आदेश जारी किए थे, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने पूर्व की कार्रवाइयों का पूरा विवरण भी तलब किया है।
यह है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन
- स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए और आगे-पीछे किराये के वाहन होने पर ‘ऑन स्कूल ड्यूटी’ लिखा होना अनिवार्य है।
- बस पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
- वाहन में स्पीड गवर्नर (अधिकतम गति 40 किमी प्रति घंटा), जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और अंदर दो सीसीटीवी कैमरे (आगे और पीछे) लगे होने चाहिए।
- खिड़कियों पर हॉरिजॉन्टल ग्रिल (जालियां) और दरवाजों पर मजबूत व विश्वसनीय ताले होने चाहिए।
- ड्राइवर के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए।
- बस में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक योग्य परिचारक (अटेंडेंट) का उपस्थित रहना अनिवार्य है।
- बस में एक सुसज्जित फर्स्ट-एड बॉक्स (प्राथमिक चिकित्सा पेटी) और अग्निशामक यंत्र होना चाहिए।
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