आरटीआई में जानकारी छिपाना पुलिस अफसरों को पड़ा भारी, जबलपुर के तत्कालीन ASP और TI पर 25-25 हजार का जुर्माना
सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है।

HighLights
- 24 घंटे थाने में रखने के मामले में आरटीआई जानकारी नहीं देने पर कार्रवाई
- राज्य सूचना आयोग ने दो पुलिस अधिकारियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
- आयोग ने रोजनामचा, रिहाई रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने के दिए निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। थाने में 24 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखने के आरोपों से जुड़े मामले में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने गोरखपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी अरविंद चौबे तथा तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय अग्रवाल पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
आदर्श नगर, गौरीघाट निवासी अजीत सिंह आनंद ने आयोग को बताया कि 20 जून, 2023 को गोरखपुर पुलिस उन्हें घर से थाने ले गई थी और 21 जून को छोड़ा गया। उन्होंने आरटीआई के तहत थाने लाने-ले जाने से संबंधित रोजनामचा, रिहाई का रिकॉर्ड तथा सीसीटीवी फुटेज की जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
प्रथम अपील में तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया।
समय-सीमा में अनिवार्य रूप से निराकरण सुनिश्चित कराया जाए
मामले की सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयोग ने रोजनामचा, रिहाई संबंधी अभिलेख तथा अन्य व्यक्तियों की पहचान छिपाकर संबंधित सीसीटीवी फुटेज निश्शुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया कि आरटीआई की प्रथम अपीलों का कानूनन निर्धारित समय-सीमा में अनिवार्य रूप से निराकरण सुनिश्चित कराया जाए।
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