दतिया में 1 साल की बच्ची की मौत, सलैया पमार में 6 और मासूम इसकी चपेट में…कभी कुपोषण मुक्ती के लिए मिला था सम्मान
दतिया जिले के सलैया पमार में 1 साल की बच्ची की कुपोषण और गंभीर एनीमिया के कारण मौत हो गई। क्षेत्र में 6 अन्य बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं, जहां कागजी …और पढ़ें

HighLights
- दतिया में कुपोषण से 1 साल की मासूम की मौत
- इसके अलावा डेरे में 6 मासूम अतिकुपोषित है
नईदुनिया प्रतिनिधि, दतिया। साल 2022 में कुपोषण नियंत्रण के नवाचारों के लिए दतिया जिले को सम्मानित किया गया था। लेकिन, अब एक बार फिर यहां कुपोषण से मौत का गंभीर मामला सामने आया है। उदगंवा क्षेत्र के सलैया पमार आदिवासी डेरा में 1 साल की मासूम नीलू आदिवासी ने सोमवार शाम इलाज के बाद घर लौटते ही दम तोड़ दिया। बच्ची को 10 अगस्त को उल्टी दस्त की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां भर्ती के समय उसका वजन महज 5.2 किलोग्राम था। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची गंभीर रूप से एनीमिक (खून की कमी) थी। यहां तक कि उसे पीआईसीयू (PICU) में वेंटिलेटर पर भी रखा गया था। अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ी और मौत हो गई।
डेरे में 6 बच्चे अतिकुपोषित, NRC जाने से कतरा रहे मां बाप
सलैया पमार आदिवासी डेरे में कुपोषण की स्थिति बेहद भयावह बनी हुई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार गांव में 6 बच्चे अतिकुपोषित (SAM) हैं, जबकि कई अन्य बच्चे मध्यम कुपोषण (MAM) की श्रेणी में आते हैं:
- चांदनी (14 माह): पिता पूरन सहारिया वजन महज 6.0 किलोग्राम
- कुनाल (18 माह): पिता कप्तान आदिवासी वजन महज 6.5 किलोग्राम
- अर्पिता (18 माह): पिता अमरजू आदिवासी वजन महज 6.8 किलोग्राम
स्वास्थ्य और आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे परिजनों को बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन दिहाड़ी मजदूरी और कामकाज छूटने के डर से परिजन जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं ठप, आधार और ID न होने से नहीं मिल रहा राशन
इस मामले के बाद कई ग्रामीणों की शिकायत सामने आई है-
- ग्रामीणों ने शिकायत की है कि सलैया पमार का उपस्वास्थ्य केंद्र अमूमन बंद रहता है। इससे प्राथमिक इलाज के लिए भी दतिया जिला अस्पताल भागना पड़ता है।
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिस्ता ने बताया कि गांव में लगभग 70 बच्चे आंगनबाड़ी उम्र के हैं, लेकिन समग्र आईडी और आधार कार्ड न होने के कारण पोषण ट्रैकर ऐप पर केवल 20 बच्चे ही पंजीकृत हो पाए हैं। शेष 50 बच्चे सरकारी पोषण योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।
प्रशासनिक रुख और जांच के आदेश
मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। इसे लेकर कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कहा कुपोषित बच्ची की मौत के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।