Indore

एमपी के लाखों लोगों को बड़ी राहत! भोपाल समेत 731 गांवों के भू-अभिलेख तीन महीने में होंगे डिजिटल


शहर सहित 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के रिकॉर्ड को अगले तीन महीनों…और पढ़ें

Publish Date: Mon, 03 Aug 2026 04:36:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 03 Aug 2026 04:36:15 PM (IST)

एमपी के लाखों लोगों को बड़ी राहत! भोपाल समेत 731 गांवों के भू-अभिलेख तीन महीने में होंगे डिजिटल
भोपाल समेत 731 गांवों के भू-अभिलेख तीन महीने में होंगे डिजिटल

HighLights

  1. भोपाल में 1954 से अब तक के भू-अभिलेख होंगे ऑनलाइन
  2. 731 गांवों के भू-स्वामियों को 3 माह में मिलेगी बड़ी राहत
  3. काशियाना बंगले में बन रहा है आधुनिक सेंट्रल रिकॉर्ड रूम

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर सहित 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के रिकॉर्ड को अगले तीन महीनों में ऑनलाइन उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके बाद पुराने भू-अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए लोगों को महीनों इंतजार और सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रमाणित प्रतियां साइबर रूम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।

जानकारी के अनुसार जिले में वर्षों पुराने भू-अभिलेखों की स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। जमीन की खरीद-फरोख्त, नामांतरण, बैंक ऋण और न्यायालयीन मामलों में इन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान व्यवस्था में लोक सेवा गारंटी के तहत आवेदन करने के बावजूद रिकॉर्ड उपलब्ध होने में कई सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग जाता है। रिकॉर्ड अलग-अलग स्थानों पर होने से अधिकारियों और आम नागरिकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जिला प्रशासन अब इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। पहले चरण में वर्ष 1954 से अब तक के सभी दस्तावेजों की स्कैनिंग की जाएगी। इसके बाद प्रत्येक रिकॉर्ड का मेटाडेटा तैयार होगा और संबंधित हल्के के पटवारी ऑनलाइन सत्यापन करेंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद सभी रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएंगे, जिससे उन्हें ऑनलाइन देखा और आवश्यकता अनुसार प्रमाणित प्रतियां प्राप्त की जा सकेंगी।

काशियाना बंगले में बनाया जा रहा है आधुनिक रिकॉर्ड रूम

कलेक्ट्रेट का रिकॉर्ड रूम भी जल्द कलेक्ट्रेट के सामने स्थित काशियाना बंगले में स्थानांतरित किया जाएगा। यहां जबलपुर कलेक्ट्रेट की तर्ज पर आधुनिक रिकॉर्ड रूम विकसित किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में सभी फाइलों को नई रैक में व्यवस्थित किया जाएगा। इससे पहले सरकारी मशीनरी की मदद से इस रिकॉर्ड को डिजिटल किया जा रहा है।

बता दें कि वर्तमान में पुराने भू-अभिलेखों का बड़ा हिस्सा मिंटो हॉल के पास स्थित रिकॉर्ड रूम में रखा हुआ है, जबकि कुछ रिकॉर्ड कलेक्ट्रेट परिसर में हैं। जिला प्रशासन का उद्देश्य अब पूरे रिकॉर्ड को एक ही स्थान पर सुरक्षित रखकर डिजिटल माध्यम से आम जनता तक सहज और त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है।

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डिजिटाइजेशन से पुराने भू-अभिलेख सुरक्षित रहेंगे, राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और नागरिकों को जमीन संबंधी रिकॉर्ड पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। इससे सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ भी कम होगी। जिसको लेकर कार्य जारी है। – प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर

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