महिला शोधार्थियों को बार-बार मैसेज भेजकर डिनर पर चलने का कहते थे यूनिवर्सिटी के विभागाध्यक्ष, पद से हटाया
शोधार्थियों का आरोप है कि विभागाध्यक्ष व्यक्तिगत स्तर पर अनावश्यक संपर्क बनाए रखते थे और एक शोधार्थी को सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर बार-बार डिनर पर चलन…और पढ़ें

HighLights
- केंद्रीय विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष को हटाया गया।
- विवि में महिला शोधार्थियों के उत्पीड़न का मामला।
- आंतरिक जांच समिति कर रही शिकायत की जांच।
नवदुनिया प्रतिनिधि, सागर। हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के सामान्य एवं व्यावहारिक भूगोल विभाग में महिला शोधार्थियों के कथित उत्पीड़न, दबाव, शिकायत वापसी के लिए मजबूर करने और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों में विश्वविद्यालय प्रशासन जांच कर रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष के प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त कर दिया है।
जांच पूरी होने तक विभाग का कार्यभार व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता को सौंपा है। यह कार्रवाई आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने के रूप में की गई है।
महिला शोधार्थियों ने लगाए गंभीर आरोप
मामले की शुरुआत जुलाई माह में तब हुई, जब भूगोल विभाग की कई महिला शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपकर विभागाध्यक्ष प्रो. भारद्वाज पर मानसिक उत्पीड़न, अमर्यादित व्यवहार, गैर-अकादमिक गतिविधियों के लिए दबाव बनाने आरोप लगाए। शोधार्थियों का आरोप है कि विभागाध्यक्ष व्यक्तिगत स्तर पर अनावश्यक संपर्क बनाए रखते थे और एक शोधार्थी को सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर बार-बार डिनर पर चलने का दबाव बनाते थे। छात्राओं का कहना है कि इससे उनके शोध कार्य और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
विभागाध्यक्ष ने भी लगाए पलटवार में आरोप
इन शिकायतों के बाद विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज की ओर से भी विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजा गया। इसमें कुछ शोधार्थियों पर अनुशासनहीनता, विभाग में अनुपस्थित रहने, फर्जी मेडिकल प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने तथा शैक्षणिक नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
शिकायत वापसी के नाम पर दबाव डालने का आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब विश्वविद्यालय में शिकायत वापस लेने संबंधी एक पत्र प्रस्तुत किया गया। लेकिन 24 जुलाई को छह महिला शोधार्थियों ने व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता प्रो. देवाशीष बोस को अलग से पत्र देकर दावा किया कि उनसे बंद कमरे में डरा-धमकाकर सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। शोधार्थियों का आरोप है कि उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज कराने, मानहानि का मुकदमा करने तथा उनका कैरियर बर्बाद करने की धमकी दी गई। आरोप यह भी लगाया गया कि दो सहायक प्राध्यापकों ने दबाव बनाकर उनसे हस्ताक्षर कराए।
विभागाध्यक्ष पद से हटाने का आदेश
आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की जांच को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय ने आदेश जारी कर प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष के प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त कर दिया। जांच पूरी होने तक विभागाध्यक्ष का कार्यभार व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता संभालेंगे।
विवेक जायसवाल, मीडिया अधिकारी, हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर