ग्वालियर: जिला अस्पताल से डॉक्टर गायब, घासमंडी केंद्र पर हफ्ते में 4 दिन ओपीडी और अल्ट्रासाउंड पर ताला
जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते स्वास्थ्य संस्थाएं मरीजों के लिए राहत केंद्र बनने के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही हैं।

HighLights
- मरीजों की सेहत से खिलवाड़
- अव्यवस्थाएं खोल रहीं सरकारी दावों की पोल
- गर्भवती परेशान, हफ्ते में सिर्फ दो दिन आती हैं महिला डॉक्टर
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के बड़े-बड़े दावे जमीनी धरातल पर आकर दम तोड़ रहे हैं। शहर के स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति इस कदर बदहाल हो चुकी है कि यहां इलाज के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। कहीं डाक्टरों की मनमर्जी के कारण गर्भवती बिना इलाज लौटने को मजबूर हैं, तो कहीं दोपहर में ही डाक्टर गायब हो जाते हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते स्वास्थ्य संस्थाएं मरीजों के लिए राहत केंद्र बनने के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही हैं।
मुरार जिला अस्पताल में ओपीडी के समय पर नहीं पहुंचे चिकित्सक
जिला अस्पताल में ओपीडी समय पर चिकित्सक नहीं पहुंच रहे हैं। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज समय पर अस्पताल पहुंचकर रजिस्ट्रेशन काउंटर से पर्ची बनवाने के बाद विभागों के बाहर पहुंच गए, लेकिन डाक्टरों के कक्ष खाली पड़े थे। इलाज की उम्मीद लेकर आए मरीज इंतजार करना पड़ा। अस्पताल के मेडिसिन विभाग के कक्ष खाली मिले। मनोरोग कक्ष में भी कोई चिकित्सक नहीं था। दंत रोग विभाग के कक्ष पर ताला लटका था।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इन सभी केंद्रों की बदहाली यह साफ बयां करती है कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी केवल वातानुकूलित कमरों में बैठकर कागजी समीक्षा कर रहे हैं। औचक निरीक्षण न होने के कारण डाक्टरों और स्टाफ के हौसले बुलंद हैं, जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
केस तीन: हफ्ते में सिर्फ दो दिन चलती है ओपीडी
घासमंडी लधेड़ी स्थित स्वास्थ्य केंद्र की कहानी सबसे ज्यादा दर्दनाक है। यहां स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते मरीजों को सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही उपचार नसीब हो पा रहा है। वजह केंद्र पर केवल एक महिला डाक्टर की पदस्थापना की गई है, जो सिर्फ सोमवार और शनिवार को ही अस्पताल पहुंचती हैं। सप्ताह के बाकी चार दिन अस्पताल में न केवल ओपीडी बंद रहती है, बल्कि अल्ट्रासाउंड जांच मशीन पर भी ताला लटका रहता है।
परेशानी: इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा खमियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में उनको को निजी सेंटरों का रुख करना पड़ता है, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। यह स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्थाएं बेहतर करने के लिए प्रयास हम कर रहे हैं। डाक्टरों के स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं मिलने की शिकायत आती हैं इसलिए अब उसने वर्क रिपोर्ट ली जाएगी। साथ ही ड्यूटी समय तक रूकने के निर्देश दिए जाएंगे। -डॉ. जगदीश सिंह राजपूत, नोडल अधिकारी, शहरी स्वास्थ्य संस्थाएं
