अन्नदाता पर आर्थिक प्रहार , रात के अंधेरे में हाथियों का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

गोंदिया। गोंदिया जिले की अर्जुनी मोरगांव तहसील इस वक्त एक भयानक संकट से जूझ रही है। जंगली हाथियों के एक विशाल झुंड ने पूरे इलाके को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। आलम यह है कि जो खेत कल तक लहलहा रहे थे, वे आज हाथियों के पैरों तले कुचले जाने के बाद ‘वीरान’ नजर आ रहे हैं।
सैकड़ो एकड़ मक्के की खेती ज़मींदोज़
बीती 14 अप्रैल की रात से शुरू हुआ यह आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथियों के झुंड ने वडेगांव-बंध्या परिसर में सैकड़ों एकड़ मक्के की खेती को जमींदोज कर दिया। इसके बाद यह झुंड गोठन गांव, प्रतापगढ़ और काली माटी होता हुआ कवठा-डोंगरगांव और बोडदे क्षेत्र की ओर बढ़ गया है।
गुरुवार, 16 अप्रैल की रात करीब 11:00 बजे मंजर और भी खौफनाक हो गया। किसान सीताराम कावडु मेंढे के खेत में घुसे हाथियों ने पलक झपकते ही मक्के की फसल को उजाड़ दिया , इतना ही नहीं, हाथियों ने किसान रामटेके के खेत में लगे सौर ऊर्जा (सोलर) पैनलों को भी तहस-नहस कर तोड़ फोड़ दिया।आधुनिक खेती के लिए लगाए गए इन उपकरणों के टूटने से किसानों की कमर टूट गई है।


दो गुटों में बंटी ‘हाथियों की फौज’
ताजा अपडेट के मुताबिक, 15 अप्रैल को हाथियों का यह बड़ा झुंड दो हिस्सों में बंट गया है।पहला समूह यह एमटीडीसी-नवेगांवबांध क्षेत्र की ओर कूच कर चुका है। वहीं दूसरा समूह इसमें 16 से 17 हाथी शामिल हैं, जो फिलहाल कवठा, डोंगरगांव और बोडदे क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं और लगातार तबाही मचा रहे हैं।
खौफ के साये में ग्रामीण: वन विभाग का अलर्ट
बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी किया है। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे हाथियों के करीब न जाएं। हालांकि, किसान इस चेतावनी से संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि उनकी साल भर की मेहनत आंखों के सामने बर्बाद हो रही है और सरकारी तंत्र व्यावहारिक उपाय करने में विफल रहा है।”सैकड़ों एकड़ फसल, सिंचाई सुविधाएं और कृषि अवसंरचना नष्ट होने से तहसील के किसानों पर भारी आर्थिक संकट छा गया है। अब मांग उठ रही है कि अर्जुनी मोरगांव तहसील को जल्द से जल्द ‘हाथी मुक्त’ घोषित किया जाए।”
रवि आर्य
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