CM ट्रेन में, अफसर चार्टर्ड प्लेन में: नागपुर की विभागीय आयुक्त की फ्लाइट से बढ़ा विवाद
नागपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जहां सार्वजनिक रूप से सादगी और खर्च नियंत्रण का संदेश देते दिखाई दे रहे हैं, वहीं कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की वीआईपी यात्रा शैली अब सवालों के घेरे में आ गई है।
स्थानीय दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी एवं नागपुर की विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी शनिवार को चर्चित कारोबारी राणा सूर्यवंशी के चार्टर्ड विमान से नागपुर से बेंगलुरु रवाना हुईं। बताया गया कि उनके साथ उनका पुत्र भी मौजूद था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुंबई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सड़क मार्ग से नागपुर लौट रहे थे, उसी दौरान विभागीय आयुक्त की चार्टर्ड उड़ान चर्चा का विषय बनी रही।
स्थानीय स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब सरकार सादगी और खर्च कटौती का संदेश दे रही है, तब वरिष्ठ अधिकारियों की ऐसी यात्राओं को किस नजर से देखा जाए।
विमान में पहले से मौजूद थे यात्री
रिपोर्ट के मुताबिक, नागपुर एयरपोर्ट पर खड़े चार्टर्ड विमान में पहले से चार यात्री मौजूद थे। इनमें कारोबारी राणा सूर्यवंशी, रमेश ढोणे, महेश थेसिया और कुमारी खुशी के नाम शामिल बताए गए हैं।
नागपुर से बेंगलुरु की इस उड़ान में बाद में विभागीय आयुक्त और उनके पुत्र भी सवार हुए।
Bombardier 45XR विमान बना चर्चा का केंद्र
स्थानीय दैनिक की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह विमान वीटी-वीआरआर कंपनी का Bombardier Learjet 45XR था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इसी विमान कंपनी का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार से जुड़ी एक विमान घटना के बाद इस कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
साथ ही यह चर्चा भी सामने आई कि केंद्र सरकार द्वारा कुछ विमानों के संचालन पर रोक लगाए जाने के बावजूद ऐसे विमान महाराष्ट्र में कैसे संचालित हो रहे हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
स्थानीय दैनिक में प्रकाशित इस रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
एक ओर मुख्यमंत्री ट्रेन और सड़क मार्ग से यात्रा कर सादगी का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिकारियों की चार्टर्ड यात्रा को लेकर अब पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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