विवेक तन्खा : सीजेपी के धरना-प्रदर्शन को समाधान की ओर ले जाने में निभाई अहम भूमिका
धनंजय प्रताप सिंह, नईदुनिया, भोपाल। राष्ट्रहित ही सर्वोपरि रहेगा, चाहे दलगत राजनीति और विचारधारा की सीमाओं से परे ही जाना पड़े, सियासत में ऐसे चेहरों की कमी होती जा रही है, लेकिन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा इस सूखे में उम्मीद हैं, जो हैं तो कांग्रेस में, लेकिन जब-जब जनहित और राष्ट्रहित का सवाल आया, उसे उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर भी प्राथमिकता दी है।
ताजा मामला नई दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के धरना-प्रदर्शन का है, जिसे समाधान की ओर ले जाने में तन्खा की अहम भूमिका सामने आई है। जब असमाजिक तत्व धरने पर कब्जा करके आंतरिक सुरक्षा में व्यवधान डालने का प्रयास कर रहे थे, तब तन्खा ने ही 26 दिनों से धरने पर बैठे सोनम वांगचुक को अनशन तोड़ने के लिए मनाया और सरकार के साथ बातचीत का रास्ता साफ हुआ।
इस तरह उन्होंने समय रहते प्रयास करके वांगचुक पर न केवल अराजकता का दाग लगने से बचाया, बल्कि छात्रों को भी आश्वस्त किया कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। इसकी शुरुआत 17 जुलाई को हुई, जब तन्खा समाधान की तलाश में सोनम की पत्नी गीतांजलि अंगमो के साथ जंतर मंतर पहुंचे और 20वें दिन धरना समाप्त करने के लिए मनाने की कोशिश की, हालांकि तब वांगचुक नहीं माने। इसी रात पुलिस ने जबरन वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया।
इसके बाद से ही तन्खा की भूमिका बढ़ी और उन्होंने सीनियर एडवोकेट के नाते पैरवी करके हाईकोर्ट के आदेश से वांगचुक को वेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया। 19 जुलाई की रात सांसदों का पत्र लेकर वह उनसे मिले और उन्हें सहमत कर लिया। तन्खा बताते हैं कि सुबह पता चला कि सोनम ने धरना समाप्त कर दिया।
कश्मीरी पंडितों के मानवाधिकार का मुद्दा हो या जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का मसला, तन्खा ने जनहित व राष्ट्रहित को ही महत्व दिया। एक कश्मीरी पंडित और सीनियर एडवोकेट होने के नाते तन्खा का रुख अपनी पार्टी (कांग्रेस) की लाइन और कश्मीरी विस्थापितों के प्रति उनकी संवेदनशीलता का उदाहरण रहा है।
वर्ष 2022 में भी विवेक तन्खा ने राज्यसभा में ऐतिहासिक प्राइवेट मेंबर बिल- ‘कश्मीरी पंडित (पुनर्प्राप्ति, बहाली, पुनर्वास और पुनर्गठन) विधेयक, 2022’ पेश किया था। इसका उद्देश्य कश्मीरी पंडितों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें अपनी मातृभूमि पर ससम्मान वापस बसाना था।
कांग्रेस दल का हिस्सा होने के बावजूद कश्मीर और राष्ट्रहित के मुद्दों पर सदैव देश की संप्रभुता और कश्मीरी विस्थापितों के मानवाधिकारों का खुलकर समर्थन करना तन्खा को राजनेताओं की अलग श्रेणी में स्थान देता है। पांच अगस्त 2019 को जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किया, तब राज्यसभा में उन्होंने सरकार के कदम पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने सरकार से सीधा सवाल पूछा था कि क्या अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीरी पंडित अपने घरों को लौट पाएंगे। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को वैध ठहराया, तब विवेक तन्खा ने राज्यसभा में स्वीकार किया कि अनुच्छेद 370 हमेशा से ही संविधान का एक अस्थायी प्रविधान था। तन्खा ने पर्दे के पीछे रहकर सबसे मुख्य और क्राइसिस मैनेजर की भूमिका निभाई।
मैं जब जनहित का काम करता हूं, तो पार्टी के बारे में नहीं सोचता। जो राष्ट्रहित में है, मैं उसके साथ खड़ा हो जाता हूं। किसी को पसंद हो तो ठीक, वरना मुझे कोई दिक्कत नहीं। राष्ट्र मेरे लिए सर्वोपरि है।
विवेक तन्खा, राज्यसभा सदस्य