Indore

पॉक्सो केस में जबलपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 20 साल की सजा काट रहा आरोपी तुरंत बरी, खुली जन्म प्रमाण-पत्र की पोल


जबलपुर हाई कोर्ट ने डिंडौरी के एक पॉक्सो प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अपील स्वीकार कर आरोपित मुकेश पंड्रो की दोषसिद्धि और सजा निरस्त कर उसे …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 05:19:45 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 05:19:45 PM (IST)

पॉक्सो केस में जबलपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 20 साल की सजा काट रहा आरोपी तुरंत बरी, खुली जन्म प्रमाण-पत्र की पोल
जबलपुर हाई कोर्ट

HighLights

  1. डिंडौरी के पॉक्सो मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी को किया दोषमुक्त
  2. अभियोजन पक्ष अदालत में पीड़िता का नाबालिग होना साबित नहीं कर सका
  3. जन्म प्रमाण-पत्र में विरोधाभास के चलते निरस्त हुई 20 साल की सजा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने डिंडौरी के एक पॉक्सो प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अपील स्वीकार कर आरोपित मुकेश पंड्रो की दोषसिद्धि और सजा निरस्त कर उसे दोषमुक्त कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी।

निचली अदालत ने सुनाई थी 20 साल की सजा, हाई कोर्ट में हुआ सहमति का दावा

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो), डिंडौरी ने आरोपित को आईपीसी की धाराओं 363, 366 व पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 के तहत दोषी ठहराकर 20 वर्ष सहित विभिन्न अवधियों की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों के बीच सहमति से संबंध थे।

जन्मतिथि के दस्तावेजों में विरोधाभास, उम्र 18 वर्ष से अधिक होने पर रिहाई के निर्देश

सुनवाई के दौरान जन्मतिथि संबंधी दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आया। कोर्ट ने पाया कि जन्म प्रमाण-पत्र घटना के करीब 11 वर्ष बाद बनाया गया था, जबकि पीड़िता की मां के बयान के आधार पर उसकी जन्मतिथि वर्ष 2005 मानी गई। इससे घटना के समय उसकी आयु 18 वर्ष से अधिक निकली।

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डीएनए रिपोर्ट समेत उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने दोषसिद्धि निरस्त कर आरोपित की तत्काल रिहाई के निर्देश दिए। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता शीर्ष अग्रवाल व शिवम कछावाहा ने पैरवी की।

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