MP के नगरीय निकायों में अफसरों का टोटा, 5 हजार पद खाली; बाबुओं के भरोसे चल रहा शहरी प्रशासन
प्रदेश के नगर निगमों सहित अन्य नगरीय निकायों में अधिकारियों का कैडर ही नहीं है। निकायों में करीब 5,000 नियमित पद खाली हैं। शहरी विकास के लिए प्रदेशभर …और पढ़ें

HighLights
- प्रदेश के नगरीय निकायों में करीब 5,000 पद रिक्त, कई जगह क्लर्क संभाल रहे हैं सीएमओ की जिम्मेदारी
- बाबुओं को सीएमओ का प्रभार देने वाले आदेश निरस्त, सरकार कर रही अधिकारियों की नियुक्ति की तैयारी
- कैडर रिव्यू के जरिए प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और वित्तीय प्रबंधन सुधारने की कवायद शुरू
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में अधिकारियों की कमी शहरी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गई है।
प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में करीब 5,000 नियमित पद रिक्त हैं, जबकि कई निकायों में क्लर्क और कार्यालय सहायक मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) का प्रभार संभालकर प्रशासन चला रहे हैं। इससे विकास कार्यों के साथ-साथ वित्तीय प्रबंधन भी प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश में कुल 413 नगरीय निकाय हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शहरी विकास की आवश्यकताओं को देखते हुए लगभग 500 सीएमओ और 3,000 इंजीनियरों की जरूरत है, लेकिन अधिकांश निकायों में आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक अमला उपलब्ध नहीं है।
कैडर नहीं, इसलिए बढ़ रही प्रशासनिक मुश्किलें
वर्तमान में निकायों में स्टाफ की व्यवस्था मध्य प्रदेश नगर पालिका सेवा (कार्यपालन) नियम 1973 के तहत की जाती है। बदलती जरूरतों और बढ़ते शहरीकरण के बावजूद अधिकारियों के कैडर का समुचित पुनर्गठन नहीं हुआ है। इसी कारण कई महत्वपूर्ण पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय अब कैडर रिव्यू का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। उम्मीद है कि इसके बाद योग्य अधिकारियों की नियुक्ति होगी और निकायों की प्रशासनिक व वित्तीय स्थिति में सुधार आएगा।
बाबुओं से वापस लिया जाएगा सीएमओ का प्रभार
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बाबुओं को सीएमओ का प्रभार दिए जाने का मुद्दा उठा था। मंत्रियों ने भी इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सर्कुलर जारी कर ऐसे सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार प्रदेश की करीब 50 नगर परिषदों में क्लर्क या कार्यालय सहायक सीएमओ का कार्य संभाल रहे थे। नई व्यवस्था के तहत अब संबंधित जिले में उपलब्ध योग्य राज्य सेवा अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर प्रभार दिया जाएगा।
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वित्तीय प्रबंधन पर भी असर
अधिकारियों की कमी का असर वित्तीय अनुशासन पर भी पड़ा है। कई नगरीय निकाय ऐसे हैं, जहां कर्मचारियों के वेतन भुगतान तक में परेशानी आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक नेतृत्व मजबूत होने से राजस्व संग्रह, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन में सुधार संभव होगा।
मप्र नगर पालिका सेवा नियम 1973 के तहत यह है अस्थायी बल की स्थिति:
| पदनाम (Designation) | कुल पदों की संख्या (Total Posts) |
| अपर संचालक | 01 |
| संयुक्त संचालक | 14 |
| मुख्य नगर पालिका अधिकारी – वर्ग (क) | 84 |
| मुख्य नगर पालिका अधिकारी – वर्ग (ख) | 107 |
| मुख्य नगर पालिका अधिकारी – वर्ग (ग) | 267 |
